संसद के मानसून सत्र में 'एंटी पेपर लीक अमेंडमेंट बिल 2026' पर जमकर राजनीतिक घमासान हुआ। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए 4 प्रमुख मांगें रखीं। वहीं लोकसभा में हंगामे के बीच 'वंदे मातरम संशोधन विधेयक 2026' पारित हुआ।
- संसद के मानसून सत्र में एंटी पेपर लीक अमेंडमेंट बिल 2026 पर तीखी बहस हुई।
- खड़गे ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पेपर लीक के मुद्दे पर जवाब मांगा।
- विपक्ष ने परीक्षाओं के लिए बाध्यकारी वार्षिक कैलेंडर और सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग रखी।
- लोकसभा में हंगामे के बीच वंदे मातरम संशोधन विधेयक पारित हुआ।
मानसून सत्र में 'एंटी पेपर लीक बिल 2026' पर सत्ता-विपक्ष में तीखी भिड़ंत
संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में माहौल बेहद हंगामेदार बना हुआ है। 'द पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस अमेंडमेंट बिल 2026' (एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक) पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को स्वयं सदन में आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के बजाय केवल अपनी कुर्सी बचाने में लगी हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी ताजा राष्ट्रीय समाचारों और राजनीतिक अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहें।
सदन में मनुस्मृति पर टिप्पणी और 'वंदे मातरम' बिल पर हंगामा
चर्चा के दौरान उस समय हंगामा बढ़ गया जब सदन में मनुस्मृति का उल्लेख किया गया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे समाज में सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करार दिया और कार्यवाही से हटाने (expunge) की मांग की। दूसरी तरफ, लोकसभा में भारी शोर-शराबे और 'चंदा चोर' व 'गद्दी छोड़ो' के नारों के बीच महज 15 मिनट के भीतर 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026' (वंदे मातरम बिल) पास कर दिया गया।
संसद परिसर में प्रदर्शन और टीएमसी-भाजपा नेताओं की मुलाकात पर चर्चा
सदन के भीतर ही नहीं, बल्कि संसद परिसर में भी विपक्षी नेताओं का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा। वहीं, संसद की कैंटीन में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिससे राजनीतिक गलियारों में कयासबाजी शुरू हो गई, हालांकि दोनों दलों के नेताओं ने किसी भी राजनीतिक गठजोड़ के दावों को खारिज कर दिया।
पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और विपक्ष की 4 प्रमुख मांगें
चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्ष ने 20 जुलाई 2026 को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के कथित प्रयोग की निंदा की। विपक्ष का कहना था कि केवल कड़े कानून (जेल और जुर्माना) बनाने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, जब तक कि प्रशासनिक जवाबदेही तय न की जाए। विपक्ष के नेता ने सरकार के सामने चार मुख्य मांगें रखीं:
- 1. देश की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी वार्षिक परीक्षा कैलेंडर (Exam Calendar) जारी किया जाए।
- 2. छात्र प्रदर्शनों और पेपर लीक मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- 3. सरकारी विभागों में खाली पड़े सभी पदों को तुरंत भरा जाए।
- 4. प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बर्बरता करने वाले दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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