संसद में गूंजा छात्रों का मुद्दा: प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा

संसद के सत्र के दौरान वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। अपने भाषण में उन्होंने हाल के महीनों में हुए विभिन्न भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उनके इस बयान के बाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक बहस तेज हो गई है।

1. शिक्षा प्रणाली और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

प्रियंका गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में गहराई से व्याप्त कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण देश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों पर भारी मानसिक और आर्थिक दबाव बन रहा है। प्रियंका गांधी ने NTA (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी) के गठन के औचित्य पर सवाल खड़े किए और शिक्षा बजट में की गई कटौती को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की आलोचना की। देश में शैक्षणिक सुधारों और शिक्षा क्षेत्र की ताजा खबरों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

2. प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की निंदा

अपने अधिकारों और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल पर प्रियंका गांधी ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जब देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाते हैं, तो सरकार उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों करती है? उन्होंने पूछा कि क्या अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे युवाओं को सरकार सुरक्षा चिंताओं के नाम पर प्रताड़ित कर रही है?

3. 'एक मां की पीड़ा': अस्पताल के वाकये का भावुक उल्लेख

भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल की एक घटना का उल्लेख किया, जहां वे घायल छात्रों से मिलने पहुंची थीं। उन्होंने एक घायल छात्रा की मां के दर्द को साझा करते हुए बताया कि कैसे उस मां ने राजनेताओं के आने पर अपना गुस्सा व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि व्यवस्था की नाकामी के कारण देश के नागरिक और अभिभावक अब आश्वासन और राजनीतिक बयानों से अपना विश्वास खो चुके हैं।

4. लोकतंत्र में जवाबदेही और सरकारी प्राथमिकताओं पर निशाना

सदन की गरिमा का जिक्र करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसद देश की अमानत है और सत्ता में बैठे लोगों को जनता के प्रति पूरी तरह जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की जमीनी समस्याओं को सुलझाने के बजाय जनसंपर्क (PR) और राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने में ज्यादा व्यस्त है। बजट आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जहां एक तरफ शिक्षा के कुल बजट आवंटन में कटौती की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं।