'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित कायस्थ पाठशाला (केपी) मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में हजारों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों से सीधा संवाद किया। रातभर हुई बारिश से मैदान में जलभराव के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र इस कार्यक्रम में शामिल हुए। यह कार्यक्रम कोटा और देहरादून के बाद 'छात्रों की गूंज' शृंखला का तीसरा आयोजन था।

'दर्द, डाटा और दौलत' पर केंद्रित रहा संबोधन

राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि वे आज छात्रों से 'दर्द', 'डाटा' और 'दौलत' के बारे में बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'डाटा आपका, दर्द आपका और दौलत इनकी।' उन्होंने भारत की करीब 40 करोड़ युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों की चर्चा के बीच भारतीय युवाओं की क्षमता को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

'1000 में सिर्फ 12 को पक्की नौकरी'

बेरोजगारी के आंकड़े पेश करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'मैं आपको आंकड़े देता हूं: हर 1000 युवाओं में से केवल 12 को ही पक्की नौकरी मिल पाती है।' उन्होंने आगे कहा कि सरकारी नौकरियों के लिए यह अनुपात और भी बदतर है, जहां हर 150 युवाओं में से केवल एक को ही सफलता मिल पाती है, वह भी पेपर लीक और भ्रष्टाचार से जूझने के बाद।

रोजगार के पांच दरवाजे बंद होने का आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि युवाओं के लिए रोजगार के पांचों प्रमुख रास्ते—विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), स्टार्टअप, सरकारी नौकरी, सार्वजनिक क्षेत्र और कॉर्पोरेट क्षेत्र—व्यवस्थित रूप से बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए बैंक ऋण मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि सरकारी भर्ती प्रक्रिया पेपर लीक और भ्रष्टाचार से ग्रस्त है।

छात्रों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। कई प्रतियोगी परीक्षार्थियों ने छात्रावासों से जुड़ी दिक्कतों और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि किस तरह पेपर लीक और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। कार्यक्रम स्थल के आसपास 'हमें नौकरी चाहिए, पैलेट गन नहीं' जैसे पोस्टर भी देखे गए।

डेटा और युवाशक्ति पर जोर

राहुल गांधी ने कहा कि 21वीं सदी में किसी भी देश की प्रगति दो चीजों पर निर्भर करती है—युवा क्षमता और डाटा। उन्होंने कहा कि भारत के पास दोनों ही प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं, क्योंकि हर भारतीय रोजाना औसतन एक गीगाबाइट डाटा खर्च करता है। उनके अनुसार, 'युवा और डाटा मिलकर ही 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था बनाते हैं', लेकिन मौजूदा व्यवस्था में इसका लाभ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रह गया है।

2027 चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद देशभर में मचे विमर्श के बीच राहुल गांधी का यह कार्यक्रम शिक्षा के केंद्र माने जाने वाले प्रयागराज में युवाओं का समर्थन जुटाने और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की जमीन मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। इंडियन यूथ कांग्रेस ने भी छात्रों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की थी और बताया कि देशभर के 250 से अधिक शहरों में छात्र इस संवाद से जुड़े।