सोमवार शाम की वह भयावह घटना, जिसने नीति घाटी को अलग-थलग कर दिया

पहाड़ों में मानसून हर साल कुछ न कुछ ऐसा दिखा जाता है, जिसे भुला पाना मुश्किल होता है। सोमवार शाम करीब साढ़े पांच बजे, उत्तराखंड के चमोली जिले में ठीक वैसा ही एक मंजर सामने आया। ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) से करीब 37 किलोमीटर आगे, नीति घाटी के लॉन्ग (तमक) इलाके में अचानक बादल फटा। देखते ही देखते तमक नाले का पानी इतना उफान पर आ गया कि उसने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को अपने साथ बहा ले जाना शुरू कर दिया — जिसमें सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का बनाया एक बेली ब्रिज भी शामिल था।

पुल के साथ बहा एक जिंदगी का सवाल भी

यह सिर्फ एक ढांचे के बहने की खबर नहीं है। चमोली की अतिरिक्त जिलाधिकारी विवेक प्रकाश के अनुसार, तमक नाले में करीब शाम 5:30 बजे अचानक तेज़ जलप्रवाह आया, जिसकी वजह से पुल ढह गया। ज्योतिर्मठ के तहसीलदार महेंद्र आर्य के मुताबिक, बीआरओ के ड्राइवर पंकज, जो पिथौरागढ़ जिले के रहने वाले हैं, उस वक्त बाढ़ के पानी को देख रहे थे जब अचानक पुल टूट गया और वे पानी में बह गए। घटना के कई घंटे बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल सका है। इसके अलावा एक कैंपर वाहन भी इसी तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी की जान जाने की पुष्ट खबर नहीं है, लेकिन पंकज की तलाश जारी है और परिवार के लिए हर गुजरता घंटा भारी होता जा रहा है।

123 बीआरटीएफ का बनाया पुल, सूरैथोता में हुआ हादसा

यह बेली ब्रिज 123 बीआरटीएफ (बॉर्डर रोड टास्क फोर्स), सूरैथोता द्वारा ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले के ऊपर बनाया गया था। यह मार्ग सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे भारत-चीन सीमा से सटे इलाकों को जोड़ता है। पुल के बहने से जुम्मा और नीति सहित करीब 15-16 गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। एहतियात के तौर पर मलारी की ओर हर तरह की वाहन आवाजाही तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है।

मुख्यमंत्री धामी ने संभाला मोर्चा, राहत कार्य में जुटीं एजेंसियां

घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन से बात कर स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, निचले इलाकों में जरूरी एहतियाती कदम उठाने और संवेदनशील स्थानों पर रह रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पुल बहने से प्रभावित गांवों में राशन, खाद्य सामग्री और जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति बाधित न हो। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) और एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमें मौके के लिए रवाना कर दी गई थीं, जो स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं। बीआरओ के अनुसार, वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू हो चुका है और उम्मीद है कि एक-दो दिन में यातायात किसी न किसी रूप में बहाल कर दिया जाएगा।

अलकनंदा का जलस्तर भी बढ़ा, नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की अपील

चमोली पुलिस के अनुसार, नीति घाटी में हुई भारी बारिश के चलते अलकनंदा नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। पुलिस ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से ज्योतिर्मठ-नीति मार्ग तमक नाले में आने वाली बाढ़ और भूस्खलन से बार-बार प्रभावित होता रहा है, और मलबा पास की धौलीगंगा नदी को भी कई बार अवरुद्ध कर चुका है।

उत्तरकाशी में भी बारिश का कहर, गंगोत्री-यमुनोत्री मार्ग बाधित

चमोली से करीब सौ किलोमीटर दूर उत्तरकाशी जिले में भी मानसून की मार कम नहीं रही। यहां लगातार हो रही मूसलधार बारिश के चलते कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ों से गिरे भारी बोल्डर और मलबे के कारण गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर पूरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं। तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील इलाकों में यातायात को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, और जिला प्रशासन ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पहाड़ों का यह मानसून: चेतावनी जो हर साल दोहराई जाती है

विशेषज्ञ लंबे समय से आगाह करते आए हैं कि हिमालय के नाजुक भूभाग में भारी बारिश किसी भी वक्त बादल फटने, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ को जन्म दे सकती है। चमोली और उत्तरकाशी की ये दोनों घटनाएं इसी सच्चाई की एक और याद दिलाती हैं। जब तक बारिश का यह दौर जारी रहेगा, प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहना होगा — और पहाड़ों में रहने वाले उन परिवारों को भी, जिनके लिए हर मानसून एक नई अनिश्चितता लेकर आता है।