जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 18,953 वोटों से हराकर अपने चुनावी करियर की पहली ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 30 साल से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर जन सुराज की जीत को बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ माना जा रहा है।
- जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में 18,953 वोटों से जीत दर्ज की.
- यह प्रशांत किशोर का पहला चुनावी चुनाव (Electoral Debut) और जन सुराज की पहली सीट जीत है.
- भाजपा पिछले 30 वर्षों से (1995 से) बांकीपुर सीट पर काबिज थी.
- प्रशांत किशोर ने इस जीत को बिहार में शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व परिवर्तन की मांग बताया.
बांकीपुर उपचुनाव 2026: प्रशांत किशोर का चुनावी डेब्यू में ऐतिहासिक प्रदर्शन
बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत हासिल की है। 3 अगस्त 2026 को हुई मतगणना में प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 18,953 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। 30 राउंड की मतगणना के अंत में प्रशांत किशोर को 61,000 से अधिक वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं। देश भर से जुड़ी ताजा राष्ट्रीय समाचारों और बिहार की राजनीति पर विस्तृत रिपोर्ट के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहें।
भाजपा के तीन दशक पुराने गढ़ में सेंध
बांकीपुर (पूर्व में पटना पश्चिम) विधानसभा सीट पिछले लगभग तीन दशकों से (1995 से) भारतीय जनता पार्टी का अजेय किला मानी जाती थी। यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीं का पारंपरिक गढ़ थी। उनके राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी, जिस पर 30 जुलाई 2026 को मतदान कराया गया था। जन सुराज पार्टी के लिए यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद यह जन सुराज की पहली चुनावी जीत है।
जीत के बाद प्रशांत किशोर का बड़ा बयान
जीत की पुष्टि के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह जीत बांकीपुर की जनता की जीत है और यह बिहार के युवाओं की ओर से दिया गया एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने कहा, "बिहार की जनता अब ऐसा मुख्यमंत्री चाहती है जो शिक्षा में सुधार करे, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करे और पलायन रोके। यह चुनाव केवल एक विधायक चुनने के लिए नहीं था, बल्कि बिहार की जनता ने केंद्र सरकार और राज्य के नेतृत्व को अपनी मंशा साफ बता दी है।"
बिहार की भावी राजनीति पर प्रभाव
प्रशांत किशोर की इस जीत ने बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक नए विकल्प की संभावनाओं को मजबूत कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के इतने सुरक्षित गढ़ में जन सुराज की जीत से एनडीए (NDA) और महागठबंधन दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। मतगणना केंद्र ए.एन. कॉलेज, पटना के बाहर जन सुराज समर्थकों ने आतिशबाजी कर और मिठाइयां बांटकर इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया।
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