नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर केंद्र सरकार और NPCI द्वारा 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले पर बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे आम जनता की जेब पर डाका डालने वाला 'मोदी हीस्ट' करार दिया। श्रीनेत ने आरोप लगाया कि पहले कैशलेस इकोनॉमी का ढोल पीटकर जनता को डिजिटल पेमेंट की आदत डाली गई और अब चुपके से टैक्स वसूला जा रहा है। आधिकारिक दिशा-निर्देशों और पेमेंट फ्रेमवर्क के लिए NPCI अधिकृत पोर्टल देखें।

सुप्रिया श्रीनेत के 5 बड़े आरोप: प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें

  • 0.4% MDR का गणित: श्रीनेत ने स्पष्ट किया कि ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। यानी ₹3,000 पर ₹12, ₹5,000 पर ₹20 और ₹10,000 के बिल पर सीधे ₹40 का कट लगेगा।
  • ग्राहकों से ही होगी वसूली: सरकार के उस दावे को खारिज करते हुए कि यह शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा, श्रीनेत ने कहा कि 5% से 8% के छोटे मुनाफे पर काम करने वाला कोई भी दुकानदार अपनी जेब से यह पैसा नहीं भरेगा, बल्कि वस्तुओं की एमआरपी (MRP) बढ़ाकर यह पूरा बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।
  • 86% मार्केट शेयर और विदेशी कंपनियों को ₹20,000 करोड़ का फायदा: कांग्रेस प्रवक्ता ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि भारत के UPI बाजार का लगभग 86% हिस्सा दो विदेशी कंपनियों—PhonePe (Walmart) और Google Pay (Alphabet)—के नियंत्रण में है। इस फैसले से सालाना 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का नया रेवेन्यू पूल बनेगा, जिससे सीधे इन विदेशी कंपनियों के वैल्यूएशन और आगामी आईपीओ (IPO) को भारी मुनाफा पहुंचेगा।
  • अमेरिकी दबाव में घुटने टेकने का आरोप: श्रीनेत ने आरोप लगाया कि लंबे समय से अमेरिकी पेमेंट दिग्गज भारत के शून्य-MDR ढांचे के खिलाफ वॉशिंगटन में लॉबिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 100% टैरिफ के दबाव के आगे झुकते हुए सरकार ने देश के संप्रभु डिजिटल पेमेंट मॉडल से समझौता कर लिया है।
  • 700 करोड़ का सवाल और RBI सरप्लस: सरकार के उस तर्क का खंडन करते हुए कि UPI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड की कमी है, श्रीनेत ने कहा कि UPI को सुरक्षित चलाने के लिए सालाना केवल ₹700 करोड़ के खर्च की जरूरत होती है। आरबीआई (RBI) द्वारा सरकार को मिलने वाले ₹2.11 लाख करोड़ के सरप्लस का मात्र 0.3% हिस्सा इस पूरे सिस्टम को मुफ़्त रखने के लिए काफी था।

महंगाई की मार के बीच डिजिटल पेमेंट पर टैक्स

प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि जब देश पहले से ही खाद्य पदार्थों की महंगाई, बेरोजगारी और महंगे ईंधन से जूझ रहा है, ऐसे समय में मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर यह नया वित्तीय बोझ क्यों लादा गया। पार्टी ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस 0.4% MDR नोटिफिकेशन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।