नर्मदापुरम से भोपाल तक किसान पदयात्रा

मध्य प्रदेश में भोपाल किसान आंदोलन इन दिनों राज्य की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में 19 किसान संगठनों ने सोमवार को नर्मदापुरम के सेठानी घाट से 'किसान क्रांति पदयात्रा' शुरू की थी। किसान बुधनी, बरखेड़ा और ओबेदुल्लागंज होते हुए पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे। नर्मदापुरम के अलावा हरदा, रायसेन और सीहोर जिलों से भी बड़ी संख्या में किसान इस आंदोलन में शामिल हुए हैं।

मूंग की शत-प्रतिशत MSP खरीद प्रमुख मांग

भोपाल किसान आंदोलन की सबसे बड़ी मांग ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित करना है। किसानों का कहना है कि सीमित सरकारी खरीद के कारण उन्हें बड़ी मात्रा में उपज खुले बाजार में समर्थन मूल्य से कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

पुलिस बैरिकेड, फिर भी शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन

यात्रा के दौरान किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए तीन बैरिकेड पार किए। प्रदर्शनकारी बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने नर्मदापुरम रोड पर धरने पर बैठ गए, जबकि मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे किसानों को होशंगाबाद रोड स्थित वीर सावरकर सेतु के पहले रोक दिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भारी पुलिस बल तैनाती के बावजूद पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा है और प्रशासन लगातार किसान नेताओं के संपर्क में है।

स्कूलों की छुट्टी, प्रशासन सतर्क

बढ़ते किसान आंदोलन को देखते हुए नर्मदापुरम रोड के आसपास स्थित कुछ स्कूलों की छुट्टी पहले ही घोषित कर दी गई थी। किसान संगठनों ने आज फिर मुख्यमंत्री आवास के घेराव का एलान किया है, जिसके मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का पत्र

आंदोलन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण राज्य के मूंग उत्पादक किसान परेशान हैं। उन्होंने मूंग खरीद प्रक्रिया को लेकर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस का सरकार पर हमला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मुद्दे पर मुखर होते हुए कहा, "कृषि मंत्री जी, डरो मत, किसानों की सुनवाई करो। किसानों की आवाज़ को राजनीति कहना सबसे आसान बहाना है, लेकिन उनकी पीड़ा सुनना मोहन सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।" कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस आंदोलन में किसानों के साथ खड़ी है।

राज्य सरकार ने मांगी केंद्र से मदद

बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने भी केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है। मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग खरीद के मुद्दे पर सहायता मांगी है। इससे साफ है कि भोपाल किसान आंदोलन अब राज्य से आगे बढ़कर केंद्र सरकार तक पहुंच गया है।

आगे की रणनीति पर मंथन

भोपाल पहुंचने के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन की आगे की रणनीति पर मंथन किया है। सूत्रों के अनुसार, जब तक मूंग खरीद को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, किसान अपना प्रदर्शन जारी रखने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।