फतेहपुर: बुनियादी सुविधाओं के लिए स्कूली बच्चों का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के सर्वोदय इंटर कॉलेज, किशनपुर में स्कूली छात्रों ने विद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से बिजली और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं न मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों ने स्कूल स्टाफ और अध्यापकों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन तेज करेंगे। यह घटना दर्शाती है कि आज की स्कूली पीढ़ी भी अपनी बुनियादी जरूरतों को लेकर मुखर होने से नहीं हिचक रही।

असम: मंत्री की बेटी CJP प्रदर्शन में शामिल

असम में इस पीढ़ीगत बदलाव की एक और बड़ी झलक तब देखने को मिली, जब राज्य के राजस्व मंत्री केशब महंता की बेटी दिबिशा महंता गुवाहाटी के चाचल इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए एक प्रदर्शन में शामिल हुईं। यह प्रदर्शन 23 जुलाई को हुआ था, जिसमें एनईईटी-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जवाबदेही और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। वीडियो में दिबिशा को छात्र कार्यकर्ताओं के साथ बैठे, तख्तियां थामे और नारे लगाते देखा गया। इनमें से एक नारे में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हुई, क्योंकि इसे प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक और अशोभनीय बताया गया।

सत्ताधारी गठबंधन में असहजता

यह विवाद इसलिए भी अहम माना गया क्योंकि केशब महंता असम गण परिषद (AGP) के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं, जो राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन का हिस्सा है। वे 2016 से लगातार असम कैबिनेट में मंत्री रहे हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दिबिशा महंता की भागीदारी पर सीधे कोई टिप्पणी करने से परहेज किया। विवाद बढ़ने के बाद दिबिशा का सोशल मीडिया अकाउंट निष्क्रिय या अनुपलब्ध हो गया।

ओडिशा में भी ऐसा ही मामला

असम के इस विवाद के तुरंत बाद ओडिशा में भी एक समानांतर घटना सामने आई। भुवनेश्वर की भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन रहार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का खुलेआम स्वागत करते हुए अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट डाली, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया। इस पोस्ट को लेकर भाजपा के कुछ नेताओं और समर्थकों में नाराजगी देखी गई, हालांकि कुछ लोगों ने इसे अर्चिता का "साहस" बताते हुए सराहा भी।

अंततः धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

इन घटनाओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनईईटी पेपर लीक विवाद को लेकर बढ़ते जन दबाव के बाद अंततः इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम दिखाता है कि जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन केवल दिल्ली या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सत्ताधारी दल के भीतर परिवारों तक में बहस छेड़ दी।

क्या यह पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है?

फतेहपुर के स्कूली छात्रों से लेकर सत्ताधारी दल के नेताओं की बेटियों तक, इन घटनाओं में एक समान सूत्र यह है कि यह पीढ़ी अब सुविधाओं और जवाबदेही को किसी "एहसान" के रूप में नहीं, बल्कि अपने बुनियादी अधिकार के रूप में देख रही है। हालांकि इन दोनों मामलों (फतेहपुर और असम-ओडिशा) की प्रकृति और पैमाना अलग-अलग है, लेकिन दोनों ही इस बात के संकेत हैं कि जवाबदेही की मांग अब उम्र, पद या राजनीतिक पृष्ठभूमि की सीमाओं से परे जा रही है।