नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जवाबदेही और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। घंटों चले इस धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने मंगलवार शाम इन नेताओं को हिरासत में ले लिया। सरकार ने संसद में चर्चा कराने पर सहमति जताई, लेकिन प्रधान के इस्तीफे की मांग पर रुख नहीं बदला, जिसके चलते गतिरोध बना रहा। कांग्रेस ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
- नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेता पीएम आवास के बाहर धरने के दौरान हिरासत में लिए गए।
- यह धरना सोमवार को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद शुरू हुआ था।
- प्रदर्शनकारियों ने संसद में नीट पर चर्चा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
- सरकार ने संसद में चर्चा कराने पर सहमति जताई, लेकिन प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बनी।
- कांग्रेस ने हिरासत के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
घटनाक्रम: पीएम आवास के बाहर धरना और हिरासत
मंगलवार को दिल्ली की राजनीति में उस समय भारी तनाव देखने को मिला जब दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य विपक्षी नेताओं को 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर से हिरासत में ले लिया। ये नेता नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर घंटों से धरने पर बैठे थे।
विवाद की जड़: नीट पेपर लीक और छात्रों पर कार्रवाई
यह आंदोलन सोमवार को संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद भड़का। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों में गहरा आक्रोश है, और जंतर-मंतर सहित कई शहरों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। लखनऊ में भी सोमवार को छात्रों, अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने नीट-यूजी पेपर लीक और एनटीए को भंग करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।
प्रमुख मांगें और घटनाक्रम
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह थी कि संसद में नीट मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराई जाए, साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई गई। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने धरना स्थल पर पहुंचकर राहुल गांधी से मुलाकात की। जितेंद्र सिंह के अनुसार, सरकार ने नेतृत्व से चर्चा के बाद संसद में नीट पर बहस कराने पर सहमति जता दी थी, लेकिन इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधान के इस्तीफे की नई मांग जोड़ दी। जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के इस रुख को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत करार दिया।
हिरासत में लिए जाने की प्रक्रिया
मंगलवार शाम दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने धरना स्थल को जबरन खाली कराया और राहुल गांधी सहित अन्य सांसदों को हिरासत में लेकर वाहनों में बिठाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लेने वाले कुछ पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नेमप्लेट नहीं थी और नेताओं को सड़क पर घसीटते हुए वाहनों तक ले जाया गया। हिरासत में लिए जाते समय प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सरकार डरी हुई है, जबकि विपक्ष उससे नहीं डरता।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस नेताओं ने हिरासत में लिए जाने के बाद भी आने वाले दिनों में आंदोलन जारी रखने और प्रधानमंत्री तथा शिक्षा मंत्री दोनों के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहने का ऐलान किया। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने की कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए। पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर एक महीने से अनशन कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी से सरकार बातचीत करने को तैयार नहीं, जबकि राहुल गांधी को पीएम आवास के बाहर धरने की अनुमति दे दी गई।
पृष्ठभूमि: लंबे समय से जारी है नीट विवाद
नीट-यूजी पेपर लीक का मुद्दा वर्षों से भारतीय राजनीति में गूंजता रहा है। इससे पहले भी विपक्षी दलों ने संसद और सड़क, दोनों जगह इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन, पुतला दहन और धरने आयोजित किए हैं। एक्टिविस्ट अभिजीत डिप्के की कॉकरोच जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाया था।
आगे की राह
फिलहाल हिरासत में लिए गए नेताओं को कुछ समय बाद रिहा किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि नीट मुद्दे पर उनका आंदोलन थमने वाला नहीं है। संसद के आगामी सत्र में इस विषय पर एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
दादर NEET आंदोलन: महिला + लहान मुलाला पोलिस ताब्यात
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