लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को मध्य प्रदेश की आर्थिक और शैक्षणिक राजधानी इंदौर में अपने राष्ट्रव्यापी छात्र संवाद अभियान 'छात्रों की गूंज' के पांचवें चरण को संबोधित किया। इंदौर, उज्जैन और आसपास के जिलों से आए हजारों प्रतियोगी छात्रों और युवाओं से सीधे रूबरू होते हुए उन्होंने पेपर लीक की लगातार होती घटनाएं, भर्ती परीक्षाओं में देरी, विश्वविद्यालयों में रिक्त पद और उच्च शिक्षा के बढ़ते खर्च जैसे मुद्दों पर चर्चा की। इससे पहले यह अभियान राजस्थान के कोटा, उत्तराखंड के देहरादून, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित किया जा चुका है।

नेहरू स्टेडियम की अनुमति रद्द और IDA ग्राउंड में स्थानांतरण

इस संवाद कार्यक्रम को आयोजित करने में कांग्रेस पार्टी को प्रशासनिक स्तर पर काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह कार्यक्रम पहले 12 सितंबर को इंदौर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होना तय था। हालांकि, नगर निगम प्रशासन ने मैदान के रखरखाव का हवाला देते हुए अनुमति निरस्त कर दी, जिसके बाद कार्यक्रम को 19 सितंबर के लिए पुनर्निर्धारित किया गया। इसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की लगभग 12,000 वर्ग मीटर जमीन ₹10.08 लाख का शुल्क जमा कर किराए पर ली।

बारिश के चलते मैदान में कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बनने पर आयोजकों ने लगभग 2.5 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में एक विशाल वाटरप्रूफ जर्मन हैंगर डोम तैयार करवाया, जिससे भंवरकुआं और गीता भवन जैसे कोचिंग हब से आने वाले छात्रों के बैठने की व्यवस्था की गई।

जस्टिस वर्मा कमीशन रिपोर्ट और सुरक्षा शर्तों पर तीखा टकराव

कार्यक्रम की मंजूरी के दौरान इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा जारी शर्तों पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। पुलिस के आदेश में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 में हुई हत्या की जांच करने वाले जस्टिस जे.एस. वर्मा कमीशन की रिपोर्ट का हवाला दिया गया। पुलिस ने रिपोर्ट में उल्लिखित 'आयोजकों की लापरवाही और स्थानीय भीड़ के अनियंत्रित व्यवहार' की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस समन्वयकों पर कड़ी जिम्मेदारियां तय कीं।

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इस संदर्भ पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे 'राजनीतिक दबाव और संवेदनहीनता' करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी की एसपीजी सुरक्षा केंद्र सरकार पहले ही 2019 में वापस ले चुकी है। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेताओं के लिए यह एक सामान्य प्रोटोकॉल है। सुरक्षा शर्तों के तहत 1,500 निजी स्वयंसेवकों (500 महिलाओं सहित), पूरे परिसर में चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी और अनधिकृत ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध अनिवार्य किया गया था।

छात्र संवाद में उठाए गए प्रमुख नीतिगत मुद्दे

संवाद के दौरान विपक्षी नेताओं ने राज्य व केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए:

  • उच्च शिक्षा बजट में कटौती: मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश के बजट में उच्च शिक्षा के लिए लगभग ₹4,000 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो कुल बजट का महज 0.96% है।
  • 27% ओबीसी आरक्षण और रिक्तियां: कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य की सरकारी भर्तियों में 27% ओबीसी आरक्षण के अटके होने और प्रदेश के विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों के हजारों पदों के खाली रहने का मुद्दा उठाया।
  • पारंपरिक रैलियों से अलग प्रारूप: इस अभियान में पारंपरिक राजनीतिक भाषणों, फूल-मालाओं और पार्टी झंडों के बजाय नुक्कड़ नाटक, ओपन माइक सत्र और छात्रों के साथ सीधे सवाल-जवाब का खुला मंच तैयार किया गया।