तीसरे दौर की बातचीत के बाद आंदोलन वापस

दिल्ली के संविधान क्लब में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जंतर-मंतर पर चल रहा अपना 37 दिन पुराना आंदोलन 'सद्भावना' में वापस लेने की घोषणा की। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि पार्टी इस भरोसे के साथ आंदोलन वापस ले रही है कि सरकार तय समय-सीमा के भीतर सहमत शर्तों को पूरा करेगी।

पहली मांग: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पूरा हुआ

आंदोलन की सबसे पहली और गैर-समझौता योग्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। शनिवार सुबह ही प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था, यह कहते हुए कि छात्रों के व्यापक हित को ध्यान में रखकर उन्होंने यह कदम उठाया है। इसी के बाद बातचीत में सीजेपी की दो अन्य प्रमुख मांगों — मुआवजा और एफआईआर वापसी — पर चर्चा आगे बढ़ी।

एफआईआर वापसी पर सहमति, लिखित गारंटी का इंतजार

सीजेपी प्रवक्ताओं के अनुसार, दिल्ली और भाजपा शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने पर सरकार ने सैद्धांतिक सहमति जताई है। सौरव दास ने बताया कि इस बाबत उन्होंने सरकार को एक लिखित गारंटी का मसौदा सौंपा है, और सरकार ने मंगलवार तक इसका जवाब देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंगलवार तक एफआईआर वापसी और भविष्य में किसी भी कार्रवाई को लेकर सरकार की लिखित गारंटी मिल जाएगी।

मुआवजे पर 'सैद्धांतिक' सहमति

प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सीजेपी ने नीट से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग रखी थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है और नियमों व विनियमों के दायरे में रहते हुए प्रभावित परिवारों को अधिकतम संभव सम्मानजनक मुआवजा देने पर सहमति जताई है। हालांकि, सटीक राशि और भुगतान की समय-सीमा को लेकर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

पांच सूत्री शिक्षा सुधार चार्टर पर चर्चा जारी रहेगी

सौरव दास ने बताया कि उन्होंने बैठक में सरकार के सामने अपना व्यापक पांच सूत्री नीति सुधार चार्टर भी रखा, जिसमें शिक्षा प्रणाली और परीक्षा सुधारों से जुड़े सुझाव शामिल हैं। जेपी नड्डा ने पत्रकारों को बताया कि करीब दो घंटे चली इस बैठक में सीजेपी ने तीन मुख्य मांगें और परीक्षा प्रणाली को लेकर पांच सुधार सुझाव रखे। इन सुधारों पर विस्तार से चर्चा के लिए करीब चार सप्ताह बाद बातचीत का अगला दौर आयोजित किया जाएगा।

आंदोलनकारियों से शांतिपूर्वक घर लौटने की अपील

सभी प्रमुख मांगों पर सरकार से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने आधिकारिक तौर पर अपना आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया और जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घरों को लौटने की अपील की। पार्टी ने कहा कि यह आंदोलन की समाप्ति नहीं बल्कि एक विराम है, और अगर सरकार तय समय-सीमा में अपने वादे पूरे नहीं करती है तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।

पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ था यह आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना 16 मई 2026 को अभिजीत डिप्के ने की थी, जो इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े राजनीतिक रणनीतिकार रह चुके हैं। यह पार्टी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की उस टिप्पणी के जवाब में सामने आई थी, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' और 'समाज के परजीवियों' से की थी। इसके बाद यह आंदोलन नीट-यूजी पेपर लीक मुद्दे से जुड़कर जंतर-मंतर पर 37 दिन तक चला, जिसमें जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन ने भी इसे राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान दिलाई।

फैक्ट-चेक: क्या पुष्ट हुआ और क्या नहीं

पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य रूप से सीजेपी प्रवक्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने संविधान क्लब में की थी, न कि सीधे जेपी नड्डा ने; जेपी नड्डा ने बैठक के बाद अलग से मीडिया को बैठक का सार बताया था। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और एफआईआर वापसी व मुआवजे पर 'सैद्धांतिक' सहमति की पुष्टि कई स्वतंत्र समाचार माध्यमों से होती है। हालांकि, मुआवजे की सटीक राशि (एक करोड़ रुपये) और एफआईआर वापसी की लिखित गारंटी अभी अंतिम रूप से सरकार की ओर से जारी नहीं की गई है — इसके लिए मंगलवार तक की समय-सीमा तय की गई है। इसलिए इन दो मांगों को 'पूर्ण रूप से स्वीकृत' के बजाय 'सैद्धांतिक सहमति और प्रक्रियाधीन' कहना अधिक सटीक होगा।