NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर बीते कई हफ्तों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन अब सीधे प्रधानमंत्री आवास तक जा पहुंचा है। मंगलवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया।

पीएम आवास तक पहुंचा प्रदर्शन

बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक दशक में विपक्षी दलों के नेताओं का सीधे प्रधानमंत्री आवास के पास जाकर धरना देना एक असामान्य घटनाक्रम है। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी के अलावा प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और चरणजीत सिंह चन्नी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सुरक्षा कारणों से इस इलाके में प्रदर्शन की सामान्यतः अनुमति नहीं होती, जिसके चलते पुलिस बल को नेताओं को वहां से हटाने के लिए भेजा गया।

जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन और वांगचुक का अनशन

यह आंदोलन मूल रूप से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था, जहां संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसे 21 दिन पूरे होने पर उनकी बिगड़ती तबीयत के चलते अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद छात्रों में आक्रोश और बढ़ गया।

संसद तक पहुंचा गुस्सा, लाठीचार्ज के आरोप

पिछले दिनों CJP के बैनर तले हजारों छात्रों ने 'चलो संसद' मार्च का आह्वान किया था, जिसमें प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए संसद भवन के करीब रायसीना मार्ग तक पहुंच गए। हालात बेकाबू होने पर पुलिस को भीड़ हटाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसे लेकर छात्रों और विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि वे किसी हिंसक विरोध के लिए नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष की मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं की मुख्य मांगें तीन हैं:

राहुल गांधी ने संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे को उठाते हुए दावा किया कि अब तक 152 पेपर लीक हो चुके हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं, लेकिन अब तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली। यह आंकड़ा राहुल गांधी के बयान पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सरकार का रुख और आगे की राह

संसद के मानसून सत्र का पहला दिन इसी मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ गया। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच प्रारंभिक स्तर की बातचीत शुरू हुई है, हालांकि छात्र अब भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। दिल्ली के बाहर भी लातूर और छत्रपति संभाजीनगर सहित कई शहरों में इस मुद्दे पर समर्थन में प्रदर्शन हो चुके हैं, जो बताता है कि यह आंदोलन अब दिल्ली तक सीमित नहीं रह गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस बढ़ते जन-दबाव पर क्या रुख अपनाती है और क्या मानसून सत्र के दौरान इस पर कोई ठोस नीतिगत फैसला सामने आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राहुल गांधी को हिरासत में क्यों लिया गया?

प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, क्योंकि उस इलाके में सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन की अनुमति नहीं होती।

NEET प्रदर्शन की मुख्य मांगें क्या हैं?

प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की रिहाई और पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

सोनम वांगचुक की तबीयत क्यों बिगड़ी?

सोनम वांगचुक अपने अनशन के 21वें दिन बिगड़ती तबीयत के कारण अस्पताल ले जाए गए थे, जिसके बाद उनकी पत्नी ने बिना सहमति इलाज न किए जाने की मांग की थी।

क्या यह आंदोलन सिर्फ दिल्ली तक सीमित है?

नहीं, महाराष्ट्र के लातूर और छत्रपति संभाजीनगर सहित देश के कई हिस्सों में इस मुद्दे पर समर्थन में प्रदर्शन हो चुके हैं।