दिसंबर 2023 में देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान (FRI) में आयोजित उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद से राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि उसने ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश जमीन पर (Grounded Investment) उतार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित इस सम्मेलन में ₹3.56 लाख करोड़ मूल्य के 1,779 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए थे। हालांकि, स्वतंत्र खोजी समाचार पोर्टल न्यूज़लॉन्ड्री (Newslaundry) द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और जमीनी पड़ताल के आधार पर प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट ने इस आंकड़े के वर्गीकरण, प्रमाणिकता और वास्तविक पूंजी प्रवाह पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

RTI पड़ताल का मुख्य केंद्र: 3,300 प्रविष्टियां और छोटे कारोबार

जांच रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग विभाग से प्राप्त 'ग्राउंडिंग सूची' में लगभग 3,300 प्रविष्टियां दर्ज थीं, जबकि समिट में मूल रूप से 1,779 MoUs का दावा किया गया था। इस विसंगति की पड़ताल के दौरान यह सामने आया कि बड़े विनिर्माण और कॉर्पोरेट संयंत्रों के अलावा, सूची में स्थानीय आटा चक्कियां, खाद-बीज की दुकानें, छोटे पैथोलॉजी क्लीनिक और गैर-सरकारी संगठन (NGOs) भी निवेशक के रूप में दर्ज थे।

रिपोर्टर द्वारा संपर्क किए जाने पर इनमें से कई छोटे स्थानीय कारोबारियों ने अनभिज्ञता जताई कि उनके नियमित व्यावसायिक विस्तार या सामान्य लाइसेंसिंग को 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्राउंडेड निवेश के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उत्तराखंड उद्योग विभाग के अतिरिक्त निदेशक शिखर सक्सेना ने यह स्वीकार किया कि राज्य के आर्थिक विकास में सूक्ष्म इकाइयों के योगदान को मान्यता (Acknowledge) देने के उद्देश्य से इन्हें सूची में शामिल किया गया था।

"एमओयू हस्ताक्षर, प्रोजेक्ट ग्राउंडिंग और वास्तविक पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) तीन पूरी तरह से अलग-अलग प्रशासनिक चरण हैं। सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों के बजटीय आवंटन को निजी औद्योगिक निवेश के रूप में दिखाना नीतिगत विसंगति पैदा करता है," आर्थिक व प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है।

पीएसयू का दबदबा: ₹35,000 करोड़ से अधिक की हिस्सेदारी

पड़ताल का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक निष्कर्ष यह है कि मूल्य के आधार पर शीर्ष 10 ग्राउंडेड परियोजनाओं में से 8 परियोजनाएं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) से संबंधित थीं। इनमें उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) और टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDCIL) के संयुक्त हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स प्रमुख हैं।

इन सरकारी परियोजनाओं का कुल मूल्यांकन ₹35,279 करोड़ था, जो सरकार द्वारा घोषित ₹1 लाख करोड़ के आंकड़े का लगभग 35% बैठता है। हालांकि इन जलविद्युत परियोजनाओं में वास्तविक सरकारी पूंजी और बुनियादी ढांचागत खर्च शामिल है, लेकिन विवाद इस बात पर है कि क्या नियमित सरकारी बजट और सार्वजनिक उपक्रमों के पूर्व-निर्धारित पूंजीगत व्यय को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से आए नए 'निजी पूंजी निवेश' के रूप में प्रचारित किया जाना उचित है।

'ग्राउंडिंग' की परिभाषा में विधिक संशोधन

दस्तावेजों के अनुसार, सरकार ने 1 दिसंबर 2023—समिट से ठीक एक सप्ताह पहले—एक अधिसूचना जारी कर 'ग्राउंडेड प्रोजेक्ट' की परिभाषा में अहम ढील दी थी। नए मानदंडों के तहत:

  • यदि कोई परियोजना सरकारी आवंटन पर आधारित थी, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा केवल आवंटन पत्र (Letter of Allotment) जारी होना ही उसे 'ग्राउंडेड' घोषित करने के लिए पर्याप्त माना गया।
  • अन्य मामलों में भूमि खरीद/पट्टा, उद्योग लाइसेंस, निर्माण कार्य की शुरुआत या संयंत्र व मशीनरी के क्रय आदेश में से किन्हीं दो शर्तों का पूरा होना पर्याप्त था।

इस शिथिल परिभाषा के चलते कई ऐसी परियोजनाओं को भी कागजों पर 'ग्राउंडेड' मान लिया गया, जहां धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था या उत्पादन वर्षों दूर था।

संदेह के घेरे में आई निजी परियोजनाएं और अनुपस्थित कॉर्पोरेट

रिपोर्ट में कुछ विशिष्ट कॉर्पोरेट मामलों में कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के अंतर को उजागर किया गया:

  • सूद एग्रो लिमिटेड: सरकारी रिकॉर्ड में ₹562 करोड़ का निवेश दर्ज था, जबकि प्रमोटर ने वास्तविक खर्च लगभग ₹4 करोड़ बताया।
  • डीएसके फूड्स: ₹233 करोड़ के प्रोजेक्ट के रूप में सूचीबद्ध, लेकिन सिडकुल (SIIDCUL) द्वारा भूमि आवंटन रद्द करने की सिफारिश की गई थी।
  • एक्मे क्लीनटेक सॉल्यूशंस: ₹2,452 करोड़ की सौर ऊर्जा परियोजना साइट पर बंद पाई गई।
  • बुलडेन्ज इंडस्ट्रीज: ₹1,200 करोड़ के प्रोजेक्ट के साथ दर्ज, जबकि कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड्स में राजस्व व कर्मचारियों की संख्या न्यूनतम पाई गई।

इसके विपरीत, समिट में घोषित बड़े निवेश—जैसे जेएसडब्ल्यू समूह के ₹15,000 करोड़, अदाणी समूह के ₹2,500 करोड़ और यथार्थ हॉस्पिटल्स के ₹800 करोड़ के वादे—ग्राउंडिंग सूची में दिखाई नहीं दिए। वहीं पतंजलि से जुड़े ₹10,000 करोड़ से अधिक के शुरुआती दावों के मुकाबले ग्राउंडिंग दस्तावेजों में केवल ₹39 करोड़ की प्रविष्टि मिली।

सरकारी रुख और आगे की राह

उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आधिकारिक रुख स्पष्ट है कि राज्य में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश सफलतापूर्वक धरातल पर उतर चुका है और इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उद्योग विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि सरकारी उपक्रम भी पूंजी निवेश और स्थानीय रोजगार बढ़ाते हैं, इसलिए उन्हें औद्योगिक विकास की समग्र गणना से अलग नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया को सीधे 'फर्जी' करार देना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा, क्योंकि कई परियोजनाओं में प्रशासनिक अनुमतियां और प्रारंभिक कार्य हुए हैं। वास्तविक आवश्यकता इस बात की है कि एक स्वतंत्र और पारदर्शी तृतीय-पक्ष ऑडिट (Third-Party Audit) कराया जाए, जो स्पष्ट रूप से यह अलग करके दिखाए कि वास्तविक निजी प्रत्यक्ष विदेशी व घरेलू पूंजी कितनी आई, सरकारी खजाने से कितना खर्च हुआ और उससे वास्तविक रोजगार कितने सृजित हुए।