जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शनिवार, 25 जुलाई 2026 को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के कुछ ही घंटों बाद यह नियुक्ति हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे वे अपने मौजूदा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों के साथ संभालेंगे।

'पूरी विनम्रता के साथ निभाऊंगा जिम्मेदारी': जोशी

अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि वे यह नई जिम्मेदारी पूरी विनम्रता और कर्तव्यभाव के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने इस अवसर के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पूरी निष्ठा से काम करेंगे ताकि मंत्रालय की अपेक्षाओं पर खरा उतर सकें।

पृष्ठभूमि: क्यों दिया था प्रधान ने इस्तीफा

जोशी की यह नियुक्ति नीट-यूजी 2026 चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हफ्तों से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद हुई है। बढ़ते दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर अपना इस्तीफा सौंपा, यह कहते हुए कि उनका यह फैसला जंतर-मंतर और देशभर में स्थिति का फायदा राष्ट्र-विरोधी तत्वों को न मिलने देने और छात्रों को कानूनी उलझनों में फंसने से बचाने के लिए लिया गया है। सीजेपी की प्रमुख मांगों में प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेना, और पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं के मामलों में प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देना शामिल था।

कौन हैं प्रल्हाद जोशी?

27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जन्मे प्रल्हाद जोशी ने 1983 में कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध केएस आर्ट्स कॉलेज, हुबली से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। कम उम्र से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे जोशी 2004 से धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिससे वे पांच बार के सांसद और भाजपा के एक अनुभवी संगठनात्मक नेता बन चुके हैं।

अब आगे की बड़ी चुनौती

प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति के साथ ही उन पर तत्काल और बड़ी जिम्मेदारियों का बोझ आ गया है। सरकार ने इस अनुभवी भाजपा नेता को शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने का जिम्मा सौंपा है — एक ऐसा मुद्दा जो बीते कई हफ्तों से संसद, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली की सड़कों तक छाया रहा है। सीजेपी द्वारा सद्भावना में आंदोलन वापस लिए जाने के बाद अब सबकी निगाहें जोशी के शुरुआती फैसलों पर टिकी हैं, जिन पर आंदोलनकारियों और विपक्ष दोनों की करीबी नजर रहेगी।