राहुल गांधी का हमला: 'शिक्षा व्यवस्था हो चुकी है धांधलीपूर्ण'

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट-यूजी पेपर लीक मुद्दे और देश की शिक्षा प्रणाली की व्यापक विफलताओं पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जो शिक्षा व्यवस्था कभी दुनिया भर में मिसाल मानी जाती थी, वह अब पूरी तरह 'धांधलीपूर्ण' (rigged) हो चुकी है और गरीब व मध्यम वर्ग के परिवार इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगत रहे हैं।

152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित — पर एक भी सज़ा नहीं

राहुल गांधी ने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देश में कम से कम 152 पेपर लीक हो चुके हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं, लेकिन आज तक किसी को भी सज़ा नहीं मिली है। उन्होंने आशंका जताई कि दर्ज न हो पाने वाली घटनाओं को जोड़ा जाए तो असली आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

परिवारों पर वित्तीय बोझ: बजट के बराबर खर्च

राहुल गांधी ने वर्तमान परीक्षा ढांचे को गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बेहद महंगा बताया। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जहां केंद्र सरकार का वार्षिक शिक्षा बजट करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये है, वहीं छात्र और उनके परिवार केवल नीट परीक्षा पर ही करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं — यानी परिवारों का खर्च सरकार के पूरे शिक्षा बजट के लगभग बराबर पहुंच गया है।

करियर के बंद होते रास्ते

शैक्षणिक मुद्दों से आगे बढ़ते हुए राहुल गांधी ने तर्क दिया कि छात्रों के लिए एक सुरक्षित भविष्य के रास्ते भी व्यवस्थित रूप से बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट, उद्यमिता के सामने आ रही चुनौतियों, कॉर्पोरेट नौकरियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण का हवाला देते हुए कहा कि आज के युवाओं के पास करियर के विकल्प लगातार सिमटते जा रहे हैं।

तीन प्रमुख मांगें

राहुल गांधी ने छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए तीन मुख्य मांगें दोहराईं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अक्षम और भ्रष्ट करार देते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। दूसरी, प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों पर जवाबदेही तय करने की मांग रखी, यह कहते हुए कि छात्र देश के दुश्मन नहीं बल्कि उसका भविष्य हैं। तीसरी और अंतिम मांग के तहत उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों को हुई पीड़ा और शारीरिक नुकसान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का आग्रह किया।

अपनी चोट पर टिप्पणी

प्रदर्शन के दौरान लगी चोट का ज़िक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे इस तरह की घटनाओं के आदी हो चुके हैं और जनता की इच्छा को अभिव्यक्त करना उनकी ज़िम्मेदारी है, इसलिए इसे वे एक छोटी सी कीमत मानते हैं।

'असली मुद्दे बनाम सरकार का भटकाव'

अपने पूरे संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों — प्रणालीगत सुधार, पारदर्शिता और सुरक्षा — और सरकार द्वारा कथित रूप से अपनाए जा रहे 'भटकावों' के बीच स्पष्ट अंतर बताने की कोशिश की। उनका आरोप था कि इन भटकावों का मकसद मूल समस्याओं से जनता का ध्यान हटाना है।

पृष्ठभूमि

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब नीट-यूजी पेपर लीक और छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक छाया हुआ है। हाल ही में लोकसभा में इस विषय पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई से जुड़ी एक याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था।