हजारों समर्थक जंतर-मंतर पर जुटे, संसद तक मार्च की कोशिश

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान सोमवार को दिल्ली में भारी अफरातफरी का माहौल रहा। दस हजार से अधिक प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे और पुलिस बैरिकेड्स को पार करते हुए संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी एनईईटी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

दिल्ली पुलिस का लाठीचार्ज

मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे सैकड़ों छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने लाठियों का इस्तेमाल किया। सांसद मार्ग पर टॉल्स्टॉय मार्ग चौराहे पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा हुई, जहां बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश के बाद सुरक्षाबलों से झड़प हो गई। जंतर-मंतर के पास आरएएफ और दिल्ली पुलिस के जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया। शास्त्री भवन के पास प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।

दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करते हुए मार्च की अनुमति नहीं दी थी। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच संक्षिप्त झड़प के बाद पुलिस ने बैरिकेड्स हटा दिए, जिसके बाद मार्च आगे बढ़ा और प्रदर्शनकारी एसबीआई बिल्डिंग पार कर संसद मार्ग की ओर बढ़ते रहे।

सोनम वांगचुक का अनशन जारी, अस्पताल से मार्च में शामिल होने की मांगी अनुमति

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं, ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर अस्थायी रूप से बाहर जाकर 'चलो संसद' मार्च में शामिल होने की अनुमति मांगी है। पत्र में उन्होंने लिखा कि वे स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। इस बीच उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सोमवार को एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग दोहराई।

तीन छात्र नेताओं का अनशन समाप्त

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे तीन छात्र नेताओं ने विपक्षी नेताओं के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया कि उनकी मांगों को संसद में उठाया जाएगा। सीजेपी ने यह भी दावा किया कि प्रशासन ने प्रदर्शन के बीच उनसे संपर्क किया है और बातचीत जारी है।

संसद के भीतर भी गूंजा मुद्दा, लोकसभा स्थगित

मानसून सत्र के पहले ही दिन इस प्रदर्शन की गूंज संसद के भीतर भी सुनाई दी। सुबह 11 बजे सत्र शुरू होते ही विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारी युवाओं के समर्थन में आवाज उठाई और सदन में तख्तियां लेकर आ गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से नियमों का पालन करने और चर्चा के जरिए मुद्दा उठाने की अपील की, लेकिन लगातार नारेबाजी के चलते सदन को कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद स्थगित करना पड़ा।

विपक्ष का रुख

विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी कि सरकार को देश की 51 प्रतिशत आबादी वाले युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लेना होगा, अन्यथा इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे। विपक्ष ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था की खामियों की जिम्मेदारी लेने और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सदन में खुली चर्चा कराने की मांग की।

आंदोलन का विस्तार, देशभर में समर्थन

सीजेपी का यह आंदोलन अब केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मुंबई, नागपुर और हैदराबाद जैसे अन्य शहरों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। इन शहरों में हुए प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ जानी-मानी हस्तियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।

पृष्ठभूमि

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत डिपके के नेतृत्व में यह आंदोलन परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और युवा बेरोजगारी को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर बढ़ते सार्वजनिक असंतोष के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है। मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रशासन और युवा-नेतृत्व वाले इस आंदोलन के बीच टकराव और गहरा होता दिख रहा है।