दिल्ली में आयोजित 'चलो संसद' मार्च के बाद छात्रों के आंदोलन ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी के बाद केंद्र सरकार ने CJP (Cockroach Janta Party) के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की है। वहीं, संसद के दोनों सदनों में भी इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए।

जेपी नड्डा से CJP प्रतिनिधियों की बैठक

प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को CJP प्रतिनिधियों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष डांका ने सरकार के साथ छात्रों की मांगों को लेकर चर्चा की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का उद्देश्य आंदोलन से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशना बताया गया।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तनाव

प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। CJP और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। संगठन का यह भी दावा है कि जंतर-मंतर के आसपास कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहीं। इन दावों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

संसद में गूंजा छात्रों का मुद्दा

राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्रों से जुड़े मुद्दों, परीक्षा अनियमितताओं और युवाओं की आवाज उठाने का प्रयास किया। सदन में हंगामे के बीच उन्होंने सरकार पर छात्रों की चिंताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, लोकसभा में भी इस मुद्दे को लेकर लगातार शोर-शराबा हुआ, जिसके कारण कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा।

कंगना रनौत और अखिलेश यादव की प्रतिक्रियाएं

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि विरोध प्रदर्शन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उचित तरीका नहीं है। उन्होंने इसे 'आर्म ट्विस्टिंग' बताया।

वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि परीक्षा घोटालों और युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया।

सरकार के रुख में बदलाव?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी और उसके बाद उत्पन्न राजनीतिक दबाव के चलते सरकार ने संवाद का रास्ता चुना है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि बातचीत किन मुद्दों पर केंद्रित है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

आगे क्या?

सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत के नतीजों पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि वार्ता सफल रहती है तो छात्रों की मांगों पर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर लगातार उठाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में सरकार के अगले कदम और बातचीत का परिणाम इस पूरे आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।