नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के प्रमुख छात्र केंद्र सत्य निकेतन में रविवार, ६ सितंबर २०२६ की शाम एक बड़ा हादसा हो गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के ठीक सामने स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत, जो छात्रों के लिए बॉयज पेइंग-गेस्ट (पीजी) हॉस्टल के रूप में संचालित हो रही थी, अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भीषण हादसे में अब तक तीन छात्रों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे से निकाले गए पांच छात्रों की हालत नाजुक बनी हुई है। स्थानीय निवासियों और आपदा कर्मियों के अनुसार इमारत के मलबे और कंक्रीट स्लैब के नीचे ३० से ४० छात्र और कर्मचारी अभी भी फंसे हो सकते हैं। आधिकारिक राहत बचाव मानकों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन निर्देशों की जानकारी के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) पोर्टल पर संपर्क करें।

युद्धस्तर पर राहत व बचाव: हैलोजन लाइट्स और स्निफर डॉग तैनात

इमारत ढहने की तेज आवाज सुनते ही आसपास के बाजार में भगदड़ मच गई। तंग गलियों के बावजूद दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की दर्जनभर गाड़ियां, हाइड्रोलिक कटर और भारी क्रेन मौके पर पहुंचाई गईं:

  • NDRF और डॉग स्क्वॉड की तैनाती: राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष शहरी खोज और बचाव टीमों ने मलबे में दबे जीवित लोगों की तलाश के लिए स्निफर डॉग और अत्याधुनिक अकौस्टिक सेंसर्स का उपयोग शुरू किया।
  • मलबे के नीचे से छात्रों की गुहार: बाहर खड़े परिजनों और साथी छात्रों ने बताया कि मलबे के नीचे फंसे कुछ छात्रों ने फोन कर अपनी लोकेशन बताने की कोशिश की, जिससे बचाव दलों को बेसमेंट और दूसरी मंजिल के सुरक्षित पॉकेट्स तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
  • अस्पताल में ग्रीन कॉरिडोर: मलबे से निकाले गए घायलों को ट्रैफिक पुलिस द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर के जरिए सफदरजंग अस्पताल और एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर आपातकालीन सर्जरी कर रहे हैं।

अवैध बेसमेंट खुदाई और जलभराव पर उठे सवाल

सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले छात्र आवासीय इलाके में हुए इस हादसे ने नगर निगम और भवन निर्माण मानकों की पोल खोल दी है:

  • अवैध बेसमेंट निर्माण का संदेह: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इमारत के निचले हिस्से में बिना अनुमति के बेसमेंट विस्तार और संरचनात्मक बदलाव का काम किया जा रहा था, जिससे मुख्य पिलर्स पर अत्यधिक दबाव पड़ा।
  • नींव में सीपेज और बारिश का असर: हाल ही में हुई मानसूनी बारिश और आसपास की पुरानी ड्रेनेज लाइनों से पानी रिसने के कारण नींव की मिट्टी धंसने की बात भी सामने आ रही है।
  • उच्चस्तरीय जांच के आदेश: दिल्ली सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का दौरा कर राहत कार्यों को चौबीसों घंटे युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इस पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।