भावनगर: गुजरात के भावनगर शहर में अपनी लिव-इन पार्टनर की बर्बरतापूर्वक हत्या करने के आरोपी फैजल उर्फ खटकी रफीक लखानी (20) को पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से पीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा कानूनी और मानवाधिकार विवाद खड़ा हो गया है। नीलमबाग पुलिस स्टेशन की टीम शनिवार को आरोपी को घटना की तस्दीक यानी क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) बस स्टैंड लेकर पहुंची थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने आरोपी को रस्सियों से बांधकर सरेआम लाठियों से पीटा। भारतीय पुलिस आचरण नियमावली, हिरासत मानकों और संवैधानिक अधिकारों के आधिकारिक विवरण के लिए गृह मंत्रालय (MHA) आधिकारिक पोर्टल पर जानकारी देखी जा सकती है।

क्या था पूरा काजल बारैया हत्याकांड?

जांच अधिकारियों के अनुसार, मृतक महिला और आरोपी दोनों सामाजिक रूप से उपेक्षित पृष्ठभूमि से आते थे:

  • फुटपाथ पर रहने वाला जोड़ा: 20 वर्षीय फैजल लखानी और 40 वर्षीय काजल बारैया भावनगर एसटी बस डिपो के बाहर फुटपाथ पर साथ रहते थे। फैजल पूर्व में आपराधिक मामले में जेल में बंद था और काजल के प्रयासों व जमानत के बाद ही बाहर आया था।
  • अवैध संबंधों के शक में विवाद: जेल से छूटने के बाद फैजल को शक हुआ कि काजल का रवि उर्फ बोड़ा राजेंद्र गोहेल नामक युवक के साथ संबंध है। 3 सितंबर को बस डिपो के मुख्य द्वार पर फैजल ने दोनों को रोककर विवाद किया।
  • किडनी फटने से मौत: विवाद बढ़ने पर फैजल ने काजल को जमीन पर गिराकर उसके पेट और पसलियों पर लगातार कई लातें मारीं। यह पूरी वारदात बस डिपो के सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में कैद हो गई। गंभीर रूप से घायल काजल को सर तख्तसिंहजी जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आंतरिक रक्तस्राव और किडनी डैमेज होने के चलते उसने दम तोड़ दिया।

क्राइम सीन रीक्रिएशन के नाम पर सरेआम पिटाई

नीलमबाग पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर 4 सितंबर को फैजल को गिरफ्तार किया। शनिवार को पुलिस इंस्पेक्टर डी. पी. उनादकट और उनकी टीम आरोपी को बस डिपो लेकर पहुंची:

  • लाठियां बरसाने का वीडियो: करीब 7 से 8 मिनट के वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी रस्सियों से बंधे फैजल को खंभों और पुलिस जीप के सहारे रोककर 100 से अधिक लाठियां और थप्पड़ मारते नजर आए।
  • सीधे जेल भेजा: सार्वजनिक पिटाई के बाद आरोपी को स्थानीय मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने उसकी पुलिस कस्टडी रिमांड न मांगते हुए सीधे न्यायिक हिरासत (जेल) भेजने का अनुरोध किया।

पुलिस का तर्क बनाम PUCL का कानूनी नोटिस

इस घटना पर पुलिस और मानवाधिकार संगठनों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है:

"फैजल एक आदतन और शातिर अपराधी है, जिस पर लूट, अपहरण और पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले के 6 गंभीर मामले दर्ज हैं। सार्वजनिक जगह पर दिनदहाड़े महिला की क्रूरता से हत्या करने से आम जनता में भय का माहौल था। महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए यह असाधारण कदम उठाया गया।"— डी. पी. उनादकट, पुलिस इंस्पेक्टर, नीलमबाग पुलिस स्टेशन

वहीं दूसरी ओर, नागरिक अधिकार संगठन 'पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज' (PUCL) गुजरात ने इस कृत्य को कानून का खुला उल्लंघन बताया है। संगठन ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और गुजरात डीजीपी के 12 मई के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी विचाराधीन कैदी को रस्सियों से बांधकर घुमाना या सार्वजनिक रूप से पीटना असंवैधानिक और पुलिस बर्बरता का हिस्सा है, जिसके लिए दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।