सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सफदरजंग अस्पताल से मेदांता, गुड़गांव शिफ्ट किया गया है, जहां वे आईसीयू में इलाजरत हैं और अपना अनशन जारी रखे हुए हैं। उनकी मांग है कि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आश्वासन दे। मेदांता पहुंचे विपक्षी सांसदों को पुलिस ने रोका, जिससे राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक पहुंच चुका है।
- सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सफदरजंग से मेदांता अस्पताल, गुड़गांव शिफ्ट किया गया।
- वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न होने के आश्वासन तक अनशन जारी रखने की बात कह चुके हैं।
- मेदांता अस्पताल पहुंचे विपक्षी सांसदों को पुलिस ने गेट पर रोक दिया, जिससे राजनीतिक टकराव बढ़ा।
- जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक पहुंच चुका है और यह 32वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
- केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने वांगचुक से मुलाकात कर बातचीत की पहल की है।
सफदरजंग से मेदांता तक: वांगचुक की शिफ्टिंग की पूरी कहानी
पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक का अनशन एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। इसके बाद वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 जुलाई (मंगलवार) को उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने डॉक्टरों की राय के आधार पर यह फैसला सुनाया, जिसके बाद मंगलवार शाम करीब 7:28 बजे वांगचुक को कड़ी सुरक्षा के बीच एम्बुलेंस से गुड़गांव के मेदांता अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती कर आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सुशीला कटारिया की देखरेख में इलाज शुरू किया गया।
अनशन तोड़ने की नई शर्त
मेदांता में इलाज के दौरान वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे एक पत्र में अपनी शर्त दोहराई। उन्होंने कहा कि वे तभी अपना अनशन समाप्त करेंगे जब केंद्र सरकार आश्वासन दे कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई, उत्पीड़न या प्रतिशोधात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि 20 जुलाई 2026 को हुआ 'चलो संसद' मार्च पुलिस की ज्यादतियों और असंगत बल प्रयोग के बावजूद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
अस्पताल के गेट पर सांसदों और पुलिस के बीच टकराव
जैसे ही विपक्ष के विभिन्न सांसद वांगचुक से मिलने मेदांता अस्पताल पहुंचे, पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार गुड़गांव पुलिस ने विपक्षी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को वांगचुक से मिलने से रोका। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन इस पूरे आंदोलन में लगातार सक्रिय रही हैं और उन्होंने वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाए जाने को गलत बताते हुए इसे मानवता के खिलाफ करार दिया था। सांसदों को रोके जाने की घटनाओं ने विपक्ष के गुस्से को और हवा दी है, हालांकि अदालत के आदेश के मुताबिक वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो को अस्पताल में उनसे मिलने की असीमित अनुमति दी गई है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और आंदोलन का विस्तार
जंतर-मंतर पर जारी यह प्रदर्शन अब केवल वांगचुक के व्यक्तिगत अनशन तक सीमित नहीं रहा। NEET-UG 2026 और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक पहुंच चुका है। रिपोर्टों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन अपने 32वें दिन में प्रवेश कर चुका है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने साफ कह दिया है कि सरकार के साथ आगे कोई बातचीत तभी होगी जब सरकार का कोई प्रतिनिधि खुद प्रदर्शन स्थल पर आकर बात करे। इस बीच जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार रात मेदांता पहुंचकर वांगचुक से करीब 45 मिनट तक बातचीत की, जिसमें सूत्रों के अनुसार सरकार ने बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही, जबकि वांगचुक ने छात्रों के आंदोलन का साथ देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
देश-विदेश में समर्थन
जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जुटी हुई है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार न्यूयॉर्क और सैन जोस जैसे शहरों में भी प्रवासी भारतीयों ने वांगचुक और छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किए, जिसमें NEET परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की गई। अदालत ने मेदांता प्रबंधन को डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित कर वांगचुक के स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी करने और मान्य चिकित्सा मानकों के अनुसार इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति एक बड़े राजनीतिक गतिरोध का रूप ले चुकी है, जहां सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सीधे संवाद की कमी और दोनों पक्षों का कड़ा रुख साफ नजर आ रहा है। वांगचुक का स्वास्थ्य अब भी अस्थिर बना हुआ है और वे फिलहाल आईसीयू में ही रहेंगे, जबकि छात्र संगठन और विपक्षी दल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और अपने साथियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
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